Sunday, 30 September 2012

बहुत जल्द ‘छिंगली डे’ भी मनाया जायेगा


अभी तक अपन ने मदर्स डे, फादर्स डे, ब्रदर्स डे, रिपब्लिक डे, इंडिपेन्डेंस डे, फेन्ड्स डे, सिस्टर्स डे, वेलेन्टाइन डे, के बारे में सुना और देखा थ पर अब ‘हार्ट डे’ भी शुरू हो गया है यानी अभी तक तो रिश्ते वाले डे मनाये जाते थे पर अब शरीर के अंगो के डे भी मनाये जाने लगे हैं। कुछ समय पहले तक एंन्टी टोबेको डे, डायबिटीज डे, एंटी केन्सर डे, जैसे रोगों के डे भी सुने थे पर अब ये डे इंसान के अंगो तक पहुंच गये हैं। कल पूरे देश में ‘हार्ट डे’ मनाया गया, हार्ट के बारे में बड़ी बड़ी बातें बतलाई गई, जिस गति से इन डे का फैशन बढ़ रहा है तो अपने को लगता है कि अब वो दिन दूर नहीं जब शरीर के दूसरे अंगो का डे भी मनाया जाने लगेगा। मसलन ‘बड़ी आंत डे’ फिर ‘छोटी आंत डे’ ‘लीवर डे’ ‘पैंक्रियाज डे’ ‘फैंफड़ा डे’ उसके बाद जब भीतरी अंग खत्म हो जायेंगे तो बाहरी अंगो का डे भी मनाया जाने लगेगा, जैसे किसी दिन होगा ‘घुटना डे’ किसी दिन ‘हाथ डे’ किसी दिन ‘कोहनी डे’ या फिर किसी रोज ‘उंगली डे’ जो लोग भी ये डे इजाद कर रहे है उनके पास बहुत बड़ी लिस्ट है और उसमें से वे छांट छांट कर ये डे माना रहे है किसी दिन अखबारों में खबर छपेगी कि आज ‘कान डे’ है तो किसी दिन ‘आंख डे’ हो जायेगा कोई रोज पता लगेगा कि आज तो ‘ऐड़ी डे’ है या फिर किसी रोज होगा ‘पेट डे’  किसी दिन ‘छाती डे’ तो किसी रोज मनाया जायेगा ’तलुआ डे’ यानी शरीर का कोई भी अंग ऐसा नहीं बचेगा जिसका डे न मानाया जाता हो अपने को तो समझ में नहीं आता कि इन डे को मनाने से होता क्या है? साल भर में एक दिन किसी अंग के बारे में सोच लिया उसके बारे में एक्सपर्ट्स ने भाषण दे दिया तो उससे होगा क्या? हो सकता है कि जब सारे के सारे अंग खत्म हो जाये और साल में दिन तब भी बचे रहे तो फिर क्या होगा? फिर ये होगा कि किसी दिन ‘बड़ी उंगली डे’ रहेगा तो किसी दिन ‘बीच वाली उंगली डे’ और जब सारी उंंगलियां खत्म हो जायेगी तो अंत में बचेगी छिंगली तो उसे भी आदमी नहीं छोडेÞगा और बता देगा कि आज ‘छिंगली डे’ है अपनी अपनी ‘छिंगली’ को बचा कर रखना होगा।
दिल को संभालें 
हार्ट डे पर डाक्टरों ने एक ही बात कही कि हर आदमी को अपना अपना दिल संभाल कर रखना चाहिये वरना कुछ भी हो सकता है, अब इन डाक्टरों को कौन बतलाये कि इंसान के जिस्म में दिल ही तो एक ऐसी चीज है जिस पर किसी का जोर नहीं चलता। वो कब किसको देखक मचल जायेगा, किस पर निगाह पड़ते ही धड़कने लगेगा ‘नो बडी नोज’ और फिर दिल कोई सोना चांदी तो है नही कि उसे बंैक के लॉकर में संभाल कर रख दें, वो तो चौबीस घंटे इंसान के साथ रहता है पर उसे संभालने का माद्दा किसी में नहीं है इसलिये तो शायरों और कवियों ने इस ‘आवारा दिल’ के बारे में तरह तरह की शायरियां और गीत लिखे हैं ‘जैसे दिल तो है दिल, दिल का ऐतबार क्या कीजे’ यानी दिल पर धेले भर का भी भरोसा मत करो, एक कहते हैं ‘दिल के झरोखे में तुझको बिठाकर यादों को तेरी मैं दुल्हन बनाकर’ यानी दिल नहीं कोई कुरसी हो गई, जिसमें माशूका  बैठ सकती है एक शायर कहता है ‘ये दिल न होता बेचारा कदम न होते आवारा’ यानी वो कह रहा है कि देखो दिल कितना बेचारा है एक शायर तो और बढ़ चढ़ कर कहते हैं ‘दिल चीज क्या है आप मेरी जान लीजिये बस एक बार मेरा कहा मान लीजिये’ इन्हें कौन बताये कि जिस दिन वे जान ले लेंगे उस दिन दिल की लाई अपने आप ही लुट जायेगी। एक गीतकार कहते हंै कि ‘दिलरूबा मंैने तेरे प्यार में क्या क्या न किया दिल दिया दर्द लिया’ अरे भैया जब किसी को अपना दिल दे दोगे तो दर्द तो होगा ही न? बिना आपरेशन के कोई भी डाक्टर तुम्हारा दिल निकाल कर किसी दूसरे को भला कैसे दे पायेगा और जब  आपरेशन होगा तो दर्द तो होगा ही, अपनी तो डाक्टरों को सलाह है कि किसी को भी दिल को संभाल कर रखने की सलाह मत दो अव्वल तो इसे कोई संभाल नहीं सकता अ‍ैर यदि लोग इसे संभालने लगे तो आप लोगों की दुकानों का क्या होगा क्यों अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारते हो?
बेटे बेटियों को नौकरी 
हाल ही में एक आयुध निर्माणी में सीबीआई ने छापा मारकर एक कर्मचारी नेता को पकड़ा है जो भरतियों में पैसे लेकर लोगों को फैक्टरियों में भरती करवाने का काम करता था। जब नेता जी फंसे तो अखबार वालों ने और भी अंदर तक की खोजबीन की तो पता लगा कि अकेले जीआईएफ में ही नहीं बल्कि दूसरी फैक्टरियों में ऐसे कई कर्मचारी नेता हंै जिन्होंने अपने बेटे, बेटियों, दामादों, भाई और भतीजें की नौकरियां वहां लगवा दी हंै इस पर भी लोगों को गहरा ऐतराज है कि उन्होंने अपने प्रभाव का उपयोग करके अपने लोगों की नौकरियां कैसे लगवा दीें अरे भैया सारी दुनिया अपने बेटे, बेटियों, रिश्तेदारों के लिये जितना हो सकता है उतना करती आई है। क्या आपने कभी सुना है कि किसी बाप ने अपने बेटे की नौकरी के लिये एप्रोच न लगाकर किस अनजान व्यक्ति के लिये जुगाड़ लगाया हो? अपन ने तो ऐसा न कभी सुना है और न देखा है, हर आदमी अपने बेटे बेटी को नौकरी पर लगा हुआ देखना चाहता है और उसके लिये तरह तरह के जितने भी जतन हो सकते हंै करता है, जब किसी से जुगाड़ लगाता है तो उसमें वजनदारी डालने के लिये यही कहता है   कि देख लेना अपना ही बेटा सा बेटी है, यदि उन नेताओं ने अपने रिश्तेदारों को अपने दम पर नौकरी पर लगवा दिया तो ऐसा क्या गुनाह कर दिया उन लोगों ने ये तो दुनिया की रीत है और फिर ‘भाई भतीजावाद’ की कहावत ऐसे ही थोड़ी न बनी है ये तो सनातन परंपरा है इसलिये उन पर ऐसी उंगली मत उठाओ, रहा सवाल पैसे लेकर नौकरी दिलवाने का तो किसी का भला ही तो किया है उस नेता ने, कौन ऐसा है दूध का धुला जो आज के जमाने में फ्री फोकट में किसी का काम कर दे इस हाथ दे उस हाथ ले ये तो चल रहा है तो वे भी कर रहे थे, अपने हिसाब से तो उसका सार्वजनिक अभिनंदन होना चाहिये जिसने इतने लोगों को नौकरी पर रखवा दिया भले ही इसके बदले मोटा माल काटा हो तो क्या हुआ।
दहेज में अलसेट 
किसी पुलिस वाले ने अपने बेटे की शादी में लड़की वालों से दहेज की मांग कर डाली और लड़की वालों ने तत्काल इस बात की शिकायत पुलिस में कर दी। अखबार वालों ने भी मोटी हैडिंग लगाकर खबर छाप दी कि पुलिस वाले ने दहेज मांग लिया । अरे भैया पुलिस वाले क्या किसी दूसरी दुनिया से आये है जब भी जहां ब्याह होता है दहेज का लेनदेन तो होता ही है पुलिस वाला है तो क्या उसे दहेज लेने का हक नहीं है जब हर जात में दहेज प्रथा बरकरार है तो उसी के तहत उसने भी दहेज मांग लिया पर वो पुलिास वाला था तो सारे के सारे लोग चढ़ बैठे उस पर दाना पानी लेकर, पुलिस वाले तो आजकल पता नहीं क्या क्या कर रहे हंै अभी लोगों ने पढ़ा नहीं कि अपने आसपास के इलाके के दो टी आई और एक सब इंस्पेक्टर दुष्कर्म के आरोप में अपनी नौकरी गंवा कर जेल की सलाखों के पीछे पहुंच गये हैं जब पुलिस वाले दुराचार कर सकते हंै तो दहेज ऐसी कौन सी बड़ी बात है जिसको लेकर इतना हल्ला मचा रहे है लोग बाग। अपने बेटे को पढ़ाने लिखाने में जो कुछ भी उसने खरचा किया होगा वो लड़की वालों से नहीं तो किससे वसूल करेगा और फिर आजकल तो हर बेटी का बाप उसके पैदा होते ही दहेज का सामान जोड़ने लगता है क्योंकि उसे भी मालूम है कि भले ही सरकारें कितने ही कानून बना दे पर जब तक इंसान के भीतर का लालच खत्म नहीं होगा ये दहेज की बीमारी यूं ही चलती ही रहेगी।
क्यों दें इस्तीफा 
जेडीए ने सिविक सेन्टर में जो कैफेटेरिया माटी मोल दे दिया था उसका आबंटन हाईकोर्ट ने रदद कर दिया इसके लिये शहर के दो कांग्रेसी नेताओं ने याचिका लगाई थी जिस पर हाईकोर्ट ने आदेश जारी कर दिया अब वे नेता हल्ला मचा रहे हैं कि चूंकि भाजपा के नेताओं ने गड़बड़ी की थी इसलिये उन्हें अपने अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिये। इस्तीफा कोई माचिस की तीली तो है नहीं कि किसी ने मांंगी और सामने वाले ने तत्काल में दे दी और फिर ये काम तो नेता लोग जमाने से कर रहे है जब वे गदद्ी पर बैठते हैं तो ये काम सबसे पहले करते हैं कि सरकारी माल की कैसे बंदरबांट की जाये, अब देखो ने कितने बिल्डरों को मंहगी जमीने माटी मोल दे दी और उसके पैसे भी नहीं लिये वे उसमें फ्लेट और डयूपलेक्स बनाकर करोड़ो कमा रहे हंै और जेडीए को पंजी नहीं दे रहे हैं उनका भी कहना है कि जिनको माल देना था दे दिया अब काहे क पैसे रही भाजपा नेताओं के इस्तीफे की बात तो भैया केन्द्र में आपकी सरकार है यहां जेडीए में भाजपा नेताओं ने माटी मोल जमीने दे दी वहां आपके नेताओं ने माटी मोल स्पेक्ट्रम दे दिये, कोयले की खाने दे दीं इस हिसाब से यदि नेता लोग इस्तीफे देने लगे तो सारा देश ही नेता विहीन हो जायेगा इसलिये ऐसी उल्टी पुल्टी मांग मत करो आबंटन रद्द हो गया यही क्या कम है?

सुपर हिट ऑफ द वीक
 श्रीमान जी से उनके किरायेदार ने आकर शिकायती लहजे में कहा
 ‘भाई साहब ये कैसा मकान है, सारी छत टपक रही है, हर कमरा तालाब बन गया है’
‘हमने तो आपको मकान किराये पर देते वक्त ही बतला दिया था कि हर कमरे में भरपूर पानी की व्यवस्था है’ श्रीमान जी ने उसे समझाते हुये कहा ।  

No comments:

Post a Comment